कहानी
मुर्गे ये काम 8,000 साल से कर रहे हैं।
चार छोटी बातें, ऐप सेट करते वक्त पढ़ लोगे।
01
मुर्गे पहले अलार्म थे, खाना बाद में बने
करीब 8,000 साल पहले दक्षिण-पूर्व एशिया के लोग जंगली मुर्गों को गाँव के पास पालने लगे। अंडे अच्छे लगते थे। असली फायदा ये था कि मुर्गा हर सुबह बांग देता था और सबको जगा देता था।
02
रोमनों ने एक पहर उसके नाम पर रखा
घड़ियाँ नहीं थीं, इसलिए रात को पहरों में बाँटा। एक पहर का नाम था बांग का समय — सूरज निकलने से ठीक पहले। कोई कहे «बांग के समय मिलना», सब जानते थे कब की बात है।
03
मुर्गे भोर को आने से पहले जान लेते हैं
जापान में वैज्ञानिकों ने मुर्गों को धुंधली रोशनी में रखा, सूरज निकला ही नहीं। मुर्गे फिर भी रोज़ लगभग दो घंटे पहले बांग देते रहे। उनकी शरीर की घड़ी सुबह हमसे बेहतर सँभालती है।
04
फिर किसी ने स्नूज़ बटन बना दिया
पहले घंटियाँ, फिर रेडियो, फिर फोन, और आखिर में एक बटन जिसे बिना सच में जागे दबा सकते हो। मुर्गे के साथ ये नहीं चलता। Kip इसीलिए है।
